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उत्तरप्रदेश क्रिकेट की दशा और दिशा बदलने वाला क्रिकेटर – ज्ञानेंद्र पांडे

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उत्तरप्रदेश क्रिकेट की दशा और दिशा बदलने वाला क्रिकेटर - ज्ञानेंद्र पांडे

ज्ञानेंद्र पांडेय का जन्म उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में 1972 में हुआ । ज्ञानेंद्र पांडे में यूपी के लिए 100 रणजी मैच खेले , वहीं 2 एकदिवसीय मैचों में उन्हें राष्ट्रीय टीम में भी खेलने का मौका मिला । ज्ञानेंद्र पांडेय का खेलने का तरीका पूर्व क्रिकेटर राहुल द्रविड़ से मिलता जुलता था , बाएं हाथ के ज्ञानेंद्र पांडे अगर एक बार क्रीज पर जम जाते थे तो उन्हें हटाना मुश्किल था। उन्होंने लेफ्ट आर्म स्पिन गेंदबाजी भी की, इसी लिए उन्हें एक बहतरीन ऑल राउंडर के रूप में जाना जाता है । 18 साल के करियर में, पांडे ने 5,348 प्रथम श्रेणी रन बनाए , साथ उन्होंने अपनी शानदार गेंदबाजी से 165 विकेट भी अपने नाम की ।

1990 के दशक में उत्तर प्रदेश क्रिकेट की रीढ़ माने जाने वाले ज्ञानेंद्र पांडे ने करियर के आखरी सालो में यूपी को पहली बार रणजी खिताब दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई , 2005-06 में यूपी टीम ने पहली बार रणजी ट्रॉफी को उठाया, तब ज्ञानेंद्र पांडेय ने 388 रनों का योगदान दिया। आशीष विंस्टन जैदी के साथ, पांडे ने उत्तर प्रदेश क्रिकेट के मूल निर्माण करने में मदद की जो कि देश में सबसे मजबूत पक्षों में से एक, पहले खिताब जीतना और फिर लगातार सीज़न में उपविजेता बनना।

उत्तरप्रदेश क्रिकेट की दशा और दिशा बदलने वाला क्रिकेटर - ज्ञानेंद्र पांडे

  • यूपी की तरफ से शानदार प्रदर्शन को देखते हुए ज्ञानेंद्र पांडेय को देवधर ट्राफी में सेंट्रल जोन के कप्तान के रूप में शानदार प्रदर्शन किया , देवधर ट्राफी में पांडे ने 4 मैचों में 10 विकेट चटकाएं , साथ ही ( 17* , 72* , 26* ) के रूप में नाबाद पारियाँ भी खेली ।
  • जिसके बाद उन्हें पाकिस्तान के खिलाफ एकदिवसीय मैचों में जगह दी गयी ।
  • ज्ञानेंद्र पांडे 2003 से 2005 तक लंकाशायर लीग में टॉडमॉर्डन के लिए खेले ।
  • 1989 में 16 साल की उम्र में यूपी के लिए पहला रणजी मैच खेलने वाले पांडे ने 2007 में क्रिकेट के सभी प्रारूपों से सन्यास की घोषणा कर दी ।

खेल क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए ज्ञानेंद्र पांडे को उत्तरप्रदेश के सबसे बड़े अवार्ड “यश भारती” से भी नवाजा गया ।  इसके अलावा यूपी का प्रतिष्ठित सम्मान “लक्ष्मण अवार्ड” भी ज्ञानेंद्र पांडे को दिया गया ।

यूपी के क्रिकेटर बताते है कि ज्ञानेंद्र पांडे ने उत्तरप्रदेश टीम को नई दिशा दी , यूपी के प्लेयर्स को दिमागी तौर पर मजबूत बनाने में भी ज्ञानेंद्र पांडे का योगदान रहा । यूपी से ही एक क्रिकेटर बताते है कि जो जोश जज्बा सौरव गांगुली ने टीम इंडिया में भरा , वही रोल ज्ञानेंद्र पांडेय ने उत्तरप्रदेश क्रिकेट में निभाया , साथ ही ज्ञानेंद्र पांडे ने एक कोच के रूप में भी खुद को साबित किया ।

दिलीप ट्राफी और देवधर ट्रॉफी टूर्नामेंट में कोच के रूप में काम किया । क्रिकेट में ज्ञानेंद्र पांडे की समझ और अनुभव देखते हुए , उन्हें बीसीसीआई की जूनियर चयन सिमिति का सदस्य बनाया गया ।

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