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“अंशुल गुप्ता” घरेलू क्रिकेट का ऐसा नाम जो लगातार अपने आपको साबित कर रहा है ।

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“भारत में क्रिकेट को धर्म माना जाता है , करोड़ो की आबादी वाले देश में , लाखों युवा है जो क्रिकेट में अपना नाम बनाना चाहते है , लेकिन जगजाहिर है कि सफल कुछ ही क्रिकेटर हो पाते है , क्योंकि इतने टफ़ कॉम्पिटिशन से निकलकर अगले पायदान तक वो ही पहुंच पाते है जो दुसरो से अलग होते है , लेकिन इस सब के बीच हजारो कहानियां ऐसी भी है जो दुनिया के सामने नहीं आ पाती ।

” अंशुल गुप्ता ” एक ऐसा नाम जो उत्तरप्रदेश के ग़ाज़ियाबाद से निकलकर सर्विसेज टीम का कप्तान बना , जो लगातार 6 – 7 साल दिल्ली के लिए अंडर 15 , 17 , 19 और 22 खेला और शानदार आउटपुट भी दिया ।

“अंशुल का दिल्ली अंडर १५ टीम में जगह बनाने का किस्सा भी कम रोचक नहीं है, अंशुल ने अंडर १५ सलेक्शन के लिए चल रहे टूर्नामेंट में क्वाटर फ़ाइनल , सेमीफाइनल और फ़ाइनल में लगातार शतक लगाकर , अपने पको प्रबल दावेदार साबित किया था लेकिन अंशुल का चयन टीम में नहीं हुआ , फिर बाद में चयनकर्ताओं को शायद अपनी गलती का एहसास हुआ , अंडर 15 टूर्नामेंट के सेमीफाइनल और फ़ाइनल में अंशुल को बुलाया गया और दोनों ही मेचो में अंशुल ने शतक जमा अपने आपको साबित किया।

अंशुल का बल्ला लगातार रन उगल रहा था लेकिन अंशुल उस समय की दिल्ली रणजी टीम में जगह नही बना पाए क्योंकि उस समय दिल्ली क्रिकेट का स्वर्णिम काल चल रहा था , आकाश चोपड़ा , गौतम गंभीर , वीरेंद्र सहवाग , शिखर धवन जैसे बल्लेबाजों से दिल्ली रणजी टीम सजी हुई थी।

सीनियर टीम में तो जगह नही मिली , लेकिन दिल्ली के लिए तमाम कैटेगरी में अंशुल लगातार रन बना रहे थे , साल आया 2010 , जहां एक तरफ रणजी टीम से खेलने की उम्मीदें टूट रही थी वहीं दूसरी तरफ एक और बुरी खबर अंशुल का इंतज़ार कर रही थी , अंशुल के पिता हरीश गुप्ता को ट्यूमर हो गया , घर की माली हालत कमजोर थी , किसी शुभचिंतक ने सलाह दी कि नेवी जॉइन कर लो , जॉब से घर का खर्च चलता रहेगा और सर्विसेज़ के लिए क्रिकेट भी खेलते रहोगे ।

सलाह तो यही थी और समय का तकाज़ा भी यही था लेकिन DDCA जैसी मजबूत एसोसिएशन छोड़कर जाना भी बेवकूफ़ी भरा कदम होता । लेकिन मजबूरी वश अंशुल को दिल्ली छोड़ना पड़ा । फिर अंशुल 2011 से अब तक लगातार सर्विसेज के लिए तीनो फार्मेट खेलते आ रहे है , 2016-17 रणजी सीजन में अंशुल ने सर्विसेज की कमान भी संभाली , अंशुल रणजी में 2000 रन पुरे कर चुके है ।

आपको बता दे सर्विसेज की टीम रणजी इतिहास में सिर्फ एक बार सेमीफाइनल में पहुंची है जिसमें अंशुल का योगदान काफी बड़ा रहा , अंशुल ने उस रणजी ट्राफी सीजन में 590 रन बनाए ।

अंशुल के पिता बताते है की जब अंशुल 7 साल का था तब वो उसे ट्रेन से ग़ाज़ियाबाद से दिल्ली लेकर जाते थे , और सुबह से रात तक स्टेडियम में ही बैठा करते थे , फाइनेंशल कंडीशन अच्छी ना होने की वजह से दिक्क़ते तो बहुत आयी , लेकिन अंशुल के जूनून और प्रतिभा ने उसकी भरपाई कर दी ,

फिलहाल सर्विसेज के लिए अंशुल मुंबई की बहुचर्चित टाइम शील्ड टूर्नामेंट में खेल रहे है जहां अब तक वो 2 शतक जमा चुके है , अंशुल कहते है कि वो लगभग 15 साल से बीसीसीआई ट्राफी खेल रहे है , और लगातार परफॉर्म भी कर रहे है , लेकिन जितने के वो हकदार थे शायद उतना ना मिलने से उनके मन में कुछ मलाल है जो अभी भी उनकी बाते में झलकता है ।

क्रिकेट दुनिया की ऐसी सेंकडो कहानियां है , जो अपने आप मे एक पूरी दुनिया है । जो बयां करती है इस चमचमाती दुनिया के पीछे किस तरह का संघर्ष और मेहनत है ।

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