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भारतीय क्रिकेट में “यूपी वालो” की अलग पहचान ।

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वैसे तो 22 गज़ की पट्टी पर खेले जाने वाला ये खेल दुनियाभर में अपनी अलग पहचान बना चुका है लेकिन भारत मे क्रिकेट को धर्म का दर्जा दिया गया है । इस खेल के प्रति इस कदर दीवानगी दुनिया के किसी कोने में दिखाई नही देती ।

वहीं अगर भारतीय क्रिकेट की बात करें तो इसमें “यूपी वालो” का जलवा हमेशा से ही रहा है ।

प्रवीण कुमार से लेकर कुलदीप यादव तक दर्जनों ऐसे नाम है जिन्होंने भारतीय क्रिकेट में यूपी का झंडा बुलंद किया है ।

प्रवीण कुमार , आरपी सिंह , महोम्मद कैफ , पीयूष चावला , कुलदीप यादव , सुरेश रैना , महोम्मद शमी जैसे बड़े नाम है जो यूपी ने भारतीय क्रिकेट को दिए । इनके अलावा भी परविंदर अवाना , सुदीप त्यागी , करण शर्मा यूपी की तरफ से राष्ट्रीय टीम में खेल चुके है ।

2005 से पहले की बात करें तो हालात इतने आसान नही थे, भारतीय टीम में दिल्ली , मुम्बई जैसे पावर हाऊस थे । यूपी की तरफ से महोम्मद कैफ एकमात्र खिलाड़ी थे जो भारतीय टीम एक हिस्सा बने हुए थे ।

ऐसे ना था कि उत्तरप्रदेश में प्रतिभाओ की कमी थी लेकिन शायद राष्टीय पटल पर उत्तरप्रदेश की आवाज़ उठाने वाला कोई नही था । लेकिन तस्वीर बदली “राजीव शुक्ला” के क्रिकेट में आ जाने के बाद । राजीव शुक्ला यूपी के कानपुर से ताल्लुक रखते है , श्री शुक्ला की पहली पहचान पत्रकारिता है , उसके बाद वर्ष 2000 में वो विधानसभा चुनाव जीतकर राजनीति में आये ।

2006 आते आते श्री शुक्ला को कांग्रेस पार्टी का राष्टीय सचिव बना दिया गया । जिसके बाद राजीव शुक्ला एक बड़ा नाम बन गए ।

बाकी भारतीय क्रिकेट प्रेमियों की तरह क्रिकेट के प्रति प्रेम की वजह से श्री शुक्ला अप्रत्यक्ष रूप से बीसीसीआई से जुड़ गए और तब 2008 में आईपीएल की शुरुआत हुई तो राजीव शुक्ला अध्यक्ष बनाये गए । 2008 से 2013 तक राजीव शुक्ला आईपीएल चेयरमैन रहे ।

यहीं से यूपी के क्रिकेट ने करवट ली , महोम्मद कैफ और आरपी सिंह के अलावा भी यूपी के लड़कों ने भारतीय टीम की दहलीज़ पर दस्तक देनी शुरू कर दी ।

मेरठ से प्रवीण कुमार , ग़ाज़ियाबाद से युवा सुरेश रैना , अलीगढ़ से फिरकी गेंदबाज पीयूष चावला , कानपुर से कुलदीप यादव और अमरोहा से तेज गेंदबाज महोम्मद शमी । इन नामों ने पिछले डेढ़ दशक में यूपी का झंडा बुंलद किया है ।

इनके अलावा भी ग़ाज़ियाबाद के सुदीप त्यागी , नॉएडा के परविंदर अवाना  और मेरठ से कर्ण शर्मा ने भारतीय क्रिकेट टीम में शामिल होने का गौरव प्राप्त किया । और ये मुमकिन हुआ “यूपी वाले शुक्ला जी” की बदौलत । क्योंकि अब कोई बीसीसीआई में मौजूद था जो

शरद पवार , श्रीनिवासन , जगमोहन डालमिया जैसे बड़े नामो के बीच यूपी की आवाज़ उठा सके और यहां की प्रतिभाओं को न्याय दिला सके।

शुक्ला जी के दुनिया की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग ” आईपीएल ” में महत्वपूर्ण पद पर रहने का फायदा भी यूपी वालो को मिला ।

आरपी सिंह , प्रवीण कुमार रिटायरमेंट से पहले आईपीएल टीमो महत्वपूर्ण हिस्सा रहे । वहीं सुरेश रैना आईपीएल में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज है । और अभी भी चेन्नई सुपरकिंग्स के उपकप्तान है । इसके अलावा महोम्मद शमी , भुवनेश्वर कुमार , करण शर्मा आईपीएल खेल रहे है ।

अब नई फौज की बात करे तो अंकित सिंह राजपूत एक , प्रियम गर्ग , त्यागी , ऐसे नाम है जो भारतीय क्रिकेट टीम की दहलीज पर दस्तक देने के लिए तैयार है । आपीएल में एकलव्य द्विवेदी , सौरभ कुमार , रिंकू सिंह की एंट्री का श्रेय भी शुक्ला जी को जाता है ।

अब वर्तमान स्थिति पर नजर डाले तो उत्तरप्रदेश से अलग हुए उत्तराखण्ड का दर्द समझते हुए राजीव शुक्ला मदद के लिए सामने आए । लगभग 20 सालो से मान्यता के लिए तरस रहे क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड को पिछले साल बीसीसीआई से मान्यता मिलीं,जिसके सूत्रधार राजीव शुक्ला रहे ।

उम्मीद है लोढा कमेटी के कूलिंग ऑफ पीरियड के पेच के चलते बीसीसीआई में अहम पदों से दूर रहने वाले श्री शुक्ला जल्द वापसी करेंगे । और विजय रथ पर सवार उत्तरप्रदेश की प्रतिभाओ को राष्ट्रीय पटल पर यूँही अपनी प्ररिभा बिखेरने के मौका मिलता रहेगा ।

 

संपादक

विकास सिंह डागर ( क्रिकेट समीक्षक )

 

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