इंटरनेशनलबायोग्राफी

फैज़ फ़ज़ल “रणजी के रण” का रन-बाज !

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भारत मे हर महीने औसतन 50 हजार बच्चे जन्म लेते है , इनमे 99.4  % बड़े होकर क्रिकेटप्रेमी बनते है और .6 % क्रिकेटर । ये 99.4 % ही इस खेल को धर्म बनाते है और .6% वालो के हाथ होती है अपनी किस्मत । जी हां बल्ले – बॉल के साथ साथ किस्मत की जरूरत भी होती है देश की टीम में शामिल होने के लिए ।

हर किसी का सपना होता है टीम इंडिया के लिए खेलना लेकिन हक़ीक़त तो ये है कि प्रदेश की टीम तक पहुँचने के लिए संघर्ष का पहाड़ चढ़ना पड़ता है ।

आज हम ऐसे ही एक क्रिकेटर के बारे में बात करेंगे जिसने कम उम्र में ही सोच लिया था कि मुझे देश के लिए खेलना है और फजल की इस सोच को सपना बनाया उनके पिता ने ।

15-16 साल की उम्र से ही फैज़ ने तेवर दिखाने शुरू कर दिए । यहां रन वहां रन , जहां मिला मैदान वहां रन ।  चयनकर्ताओं की नजर पड़ी तो सीधा अंडर 17 टीम के साथ श्रीलंका भेज दिया । फिर हर साल घरेलू स्तर पर होने वाले अंडर 19 श्रेणी टूर्नामेंट में फैज़ ने रेलवे के खिलाफ 183 रनों की पारी खेल 2004 में होने वाले अंडर 19 वर्ल्डकप के लिए ताल ठोक दी । सलेक्शन हो भी गया । मतलब कुल मिलाकर फैज़ खुली आँखों से सपना जी रहे थे ।

लेकिन जिस क़िस्मत की बात हमने शुरुआत में की थी , फैज़ का उससे पाला पड़ गया , फ़्रैक्चर हुआ और झट टीम से बाहर । बाद में उनकी जगह शिखर धवन को टीम में शामिल किया गया ।

इस सबके बाद फैज़ लगभग टूट गए , लेकिन फैज़ बताते है कि इस झटके से बाहर आने में उनके परिवार ने उनकी बहुत हेल्प की ।

फैज़ ने फिर मैदान पर वापसी की और विदर्भ की टीम में जगह बनाई , फैज़ ने अपने करियर का ज्यादातर या कहीं लगभग सारा क्रिकेट विदर्भ के लिए ही खेला । बीच मे 2019-10 में एक साल के लिए वो रेलवे क्रिकेट टीम से भी जुड़े लेकिन फिर घर वापसी कर “विदर्भ” से खेलने लगे । और लगातार खेल रहे है ।

2016 में धोनी की कप्तानी में युवाओं से सजी भारतीय क्रिकेट टीम तब ज़िम्बाब्वे पहुँची तो फैज़ फ़ज़ल भी टीम का हिसा थे । फैज़ ने पहले एकदिवसीय मैच में ही नाबाद 55* रनों की पारी खेल , अपने आप को साबित किया । हालांकि इसके बाद फिर फैज़ की वापसी टीम इंडिया में नही हो पाई । लेकिन फैज़ इंडिया ए , रेस्ट ऑफ इंडिया , राजिस्थान रॉयल्स के लिए खेलते रहे ।

फैज़ की मेहनत और तपस्या का ही नतीजा रहा कि विदर्भ ने 2018-19 में पहली बार घरेलू क्रिकेट के रण “रणजी ट्राफी” अपने नाम की । ये बड़ी कामयाबी थी । और शायद फैज़ के करियर की हाईलाइट भी ।

फैज़ ने शानदार कप्तानी तो कि ही साथ कि वो वसीम जाफर के बाद रन बनाने के मामले में दूसरे नम्बर पर रहे ।

आपको बता दें फैज़ फ़ज़ल भारत के उन खिलाड़ियो में से एक है जिनकी टेक्निक अव्वल दर्जे में गिनी जाते है ।

फैज़ कहते है कि अभी उनमें काफी क्रिकेट बाकी है , वो अभी भी फिट है और लगातार रन बना रहे है , फैज़ आगे कहते है सही बताऊं तो मैं अभी भी टेस्ट में भारत के लिए खेलने का इच्छुक हूँ । क्रिकेट में माइंडसेट मायने रखता है । 30 के बाद क्रिकेट खत्म वाली धारणा गलत है । सब माइंडसेट और फ़िटनेस का गेम है ।

फैज़ फ़ज़ल वाकई में लगातार क्रिकेट खेल रहे है । देश मे घरेलू सीजन खत्म होने के बाद वो मार्च से सितंबर तक यूके में डोमेस्टिक क्रिकेट खेल रहे होते है ।

 

और हम भी कोशिश करेंगे कि डोमेस्टिक क्रिकेट के सितारों की चमक आप तक पहुँचाये ।

क्योंकि भारतीय क्रिकेट में कई नाम ऐसे है , जिनके पास मेहनत और टेलेंट के रूप में मजबूत डिफेंस था लेकिन डेस्टिनी के हाथों रन आउट वो कई बार हुई ।

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