माहिम पीसी वर्मा का जन्म उत्तरप्रदेश के शाहजहांपुर में 21 जनवरी सन 1974 को उत्तरप्रदेश के शाहजहांपुर में हुआ था । प्रारंभिक शिक्षा गुरुनानक एकेडमी , देहरादून से ग्रहण की , इसके बाद देहरादून के ही
डीएवी इंटर कालिज से इन्होंने 10वी व 12वी की परीक्षा उत्तरीण की ।

  • डीएवी पीजी कॉलिज से B.sc और M.A. (economic) करने के बाद माहिम ने कर्नाटक स्टेट यूनिवर्सिटी से MBA ( HR / finance ) की ।
  • इसके बाद माहिम ने 1999 में उन्होंने नोएडा स्थित फ्लेक्श इंजीनियरिंग कम्पनी में कमर्शियल मैनेजर पद का भार संभाला ।
  • इसी बीच माहिम ने सिविल परीक्षा में भी किस्मत आजमाई लेकिन सफलता नही लगी ,
  • साल 2006 में उन्होंने उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी में परीक्षा सहायक के तौर पर
    पदभार संभाला ।
  • खेल के प्रति उनकी रुचि और समर्पण को देखते हुए UTU ने उन्हें खेल विभाग प्रभारी भी बनाया ,
  • लेकिन इस सबके बीच उनके मन में हमेशा टीस उठती रही कि कई राज्यो की टीमों को बीसीसीआई ने मान्यता दी है तो टीम उत्तराखंड को क्यो नही !

पिता पीसी वर्मा के पदचिन्हों पर चलते हुए , माहिम उत्तराखंड में क्रिकेट सुविधाओं को दुरुस्त करने के लिए उसके प्रसार व प्रचार में लग गए । माहिम ने सभी मैदानी व पहाड़ी जिलों में उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन के बैनर तले हर जिले में टीमों का गठन किया ।

उत्तराखंड में दशकों से चले आ रहे GOLD CUP व डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट लीग को नई तस्वीर में उतारा । 2009 में माहिम वर्मा के क्रिकेट के प्रति समर्पण व कार्यशैली को देखते हुए क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड में ज्वाइंट सेकेट्री बनाया गया ।साल दर साल वो कोशिश करते रहे कि CAU को बीसीसीआई से मान्यता मिले और प्रदेश से खेलने का युवाओं का सपना पूरा हो, और माहिम वर्मा के इस प्रयास ने रंग दिखाया , साल 13 अगस्त 2019 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशाशको की सीमिति (सीओए) ने क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड ( CAU ) को मान्यता दी

उत्तराखंड के लिए ये बड़ी खबर और बड़ा दिन था , साफ हो चुका था कि CAU को ही अब उत्तराखंड में क्रिकेट चलाने और कराने की मान्यता है । यानिकि अब प्रदेश के युवा बीसीसीआई टूर्नामेंट में अपना जलवा दिखा सकते है ।

देवभूमि कहे जाने वाले उत्तराखंड की किस्मत में

कुछ ओर बड़ा लिखा था , CAU को मान्यता मिलने के बाद बीसीसीआई इलेक्शन भी आ गए और कमाल तो तब हुआ जब बीसीसीआई एसोसिएशन मेम्बर्स की मीटिंग में शामिल होने गए माहिम वर्मा के नाम के रूप में बीसीसीआई उपाध्यक्ष की घोषणा कर दी गयी । अध्यक्ष के रूप में पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली को चुना गया । माहिम वर्मा व उत्तराखंड के लिए ये किसी सपने से कम नही था ।

लेकिन इस कामयाबी के पीछे उत्तराखंड क्रिकेट के पितामह कहे जाने वाले प्रेम प्रकाश वर्मा की मेहनत और तजुर्बे को दरकिनार नही किया जा सकता । वहीं गुण माहिम वर्मा में देखने को मिलते है ।

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